गोण्डा : श्रीमद्भगवत गीता के योग सिद्धान्तों का वैज्ञानिक मूल्यांकन व युवाओं पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव का गोण्डा का लाल रवि प्रताप पाण्डेय शोध करेगा। महाभारत के कुरुक्षेत्र में अर्जुन के विषाद और मानसिक द्वंद्व को दूर करने वाला गीता का योग सूत्र अब आधुनिक युवाओं के तनाव, प्रतिस्पर्धा, भावनात्मक असंतुल, मानसिक दबाव, आत्मविश्वास की कमी व निर्णय क्षमता से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। भारत सरकार के केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद ( आईसीएसएसआर ) ने गोण्डा होनहार लाल डा रवि प्रताप पाण्डेय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है रवि प्रताप इस समय हरियाना के महेन्द्रगढ़ जनपद में स्थिति केन्द्रीय विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के सहआचार्य के पद पर कार्यरत हैं। रवि कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम पंचायत लोढियाघाटा के निवासी हैं। रवि ने लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज से स्नातक और मनोविज्ञान में परास्नातक व पीएचडी बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से किया है। पहले बिहार और अब हरियाना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं ।उनके पिता सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय व माता सुशीला देवी बेटे के गीता के सिद्धान्तों पर शोध करने की खबर से बहुत खुश हैं। श्री प्रताप ने बताया कि गीता के सूत्रों पर शोध के लिए दो वर्ष का समय दिया गया है।उन्होंने ने बताया कि गुरुग्राम, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों के किशोरों पर अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने ने बताया कि युवाओं और उनके अभिभावकों के अनुमति पर ही उन पर शोध होगा। रवि प्रताप के सह अन्वेषक के तौर पर जेएनयू के प्रोफेसर शांदेश कुमार सिंह को अवसर मिला है। शोधकर्ताओं को किशोरों के मानसिक सवास्थ्य, भावनात्मक कल्याण, मनोवैज्ञानिक दृढ़ता को वैज्ञानिक रुप से समझना और उनके संवर्धन के लिए साक्ष्य आधारित अध्ययन करना है ।2028 तक गीता के योग सिद्धान्तों पर विस्तृत प्रतिवेदन भारत सरकार शिक्षा विभाग के भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद को सौंपना है।उन्होंने बताया कि. यदि परिणाम सकारात्मक रहा तो गीता के ज्ञान परंपरा का माडल विकसित किया जासकता है ।जिससे युवा पीढ़ी को हाईटेक जीवन शैली और इन्टरनेट के दुष्प्रभाव से रोका जा सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट - गोंडा (उत्तर प्रदेश)

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