Friday, June 19, 2026

अकबरपुर में 2 मुहर्रम का कदीमी जुलूस अकीदत और शानो-शौकत के साथ सम्पन्न

 


गाँव अकबरपुर, पोस्ट ऑफिस खोरहँसा, जनपद गोंडा, देवी पटन मण्डल में 2 मुहर्रम का कदीमी जुलूस गुरुवार को बड़े अदब, एहतराम और धार्मिक श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। जुलूस में क्षेत्र के अकीदतमंदों ने बड़ी संख्या में शिरकत कर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला की याद में अपनी अकीदत पेश की।

अंजुमन यादगारे हुसैनी के साहिबे बयाज जनाब इरशाद हुसैन साहिब के कलाम से पूरा माहौल आहो बुका के साथ ग़मगीन नज़र आया।

वहीं अंजुमन के जनरल सेक्रेटरी जनाब ज़हीर अब्बास साहब जुलूस के आगे आगे मौला ग़ाज़ी अब्बास अलैहिस्सलाम का आलम ए मुबारक लेकर चलते नज़र आये।

जुलूस निर्धारित मार्गों से होता हुआ पारंपरिक रूप से अपने मुकाम तक पहुंचा। इस दौरान या हुसैन (अ.स.) की सदाओं और नौहाख्वानी के बीच ग़मगीन माहौल देखने को मिला। अकीदतमंदों ने शांति, भाईचारे और इंसानियत के पैग़ाम को आम करने का संकल्प भी दोहराया।

जुलूस के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में जुलूस शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रशासन द्वारा यातायात और सुरक्षा के समुचित प्रबंध किए गए, जिससे किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न नहीं हुई।

क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुहर्रम के इस कदीमी जुलूस को आपसी सौहार्द, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत मिसाल बताते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में प्रेम, एकता और इंसानियत का संदेश देते हैं।


(संवाददाता : ज़हीर अब्बास , अकबरपुर, जनपद गोंडा)

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Saturday, June 13, 2026

अमेरिका के युद्ध इतिहास का सबसे बड़ा दलदल: ईरान ने महाशक्ति के घमंड को मिट्टी में मिला दिया

ईरान  :  मध्य पूर्व के तपते हुए युद्धक्षेत्र से इस समय एक बेहद भयावह और बड़ी हकीकत सामने आने का दावा किया जा रहा है। शक्ति के नशे में शुरू किए गए इस युद्ध में अमेरिका अब एक ऐसे दलदल में फँस चुका है, जहाँ से निकलने का उसे कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा। चालीस वर्षों तक कड़ी वैश्विक पाबंदियों और आर्थिक दबाव झेलने वाला ईरान आज एक मजबूत शक्ति बनकर उभरा है, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत को चुनौती दे दी है।

इस युद्ध में ईरान के पास खोने के लिए बहुत कम है, जबकि अमेरिका का बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ बताया जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प कई बार यह घोषणा कर चुके हैं कि ईरान के साथ समझौता होने वाला है, लेकिन फिर संघर्ष शुरू हो जाता है। अमेरिका पहले भी वार्ता की मेज छोड़ चुका है और इस बार भी ऐसा ही हुआ। अब एक बार फिर बमबारी के साथ बातचीत की बात की जा रही है, लेकिन क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है और अमेरिकी वादों पर भरोसा करना कठिन बताया जा रहा है।

🚀 अमेरिकी "स्टील्थ टेक्नोलॉजी" और सैन्य नुकसान का दावा

युद्ध शुरू होने के बाद से यह दावा किया जा रहा है कि:

ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों और एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों ने अमेरिका के 42 से अधिक आधुनिक लड़ाकू विमान और महंगे ड्रोन मार गिराए हैं।

अमेरिका की तथाकथित "स्टील्थ टेक्नोलॉजी" की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

पेंटागन के स्मार्ट बमों और गाइडेड मिसाइलों के भंडार पर भारी दबाव पड़ गया है।

क्षेत्र में स्थित 20 से अधिक अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अरबों डॉलर का नुकसान पहुँचने का दावा किया जा रहा है।

🗺️ क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डे

अमेरिका ईरान को घेरने के लिए जिन प्रमुख ठिकानों का उपयोग कर रहा है, उनमें शामिल हैं:

कतर (अल-उदीद एयर बेस) – मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा वायु सैन्य केंद्र।

बहरीन (फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय) – अमेरिकी नौसेना का प्रमुख अड्डा।

कुवैत (कैंप अरिफजान) – हजारों सैनिकों और भारी सैन्य वाहनों का केंद्र।

संयुक्त अरब अमीरात (अल-धफरा एयर बेस) – अमेरिकी लड़ाकू विमानों का संचालन केंद्र।

इराक और सीरिया – ऐन अल-असद, अल-तनफ और अन्य ठिकाने, जो लगातार हमलों के खतरे में बताए जाते हैं।

📉 आर्थिक प्रभाव

कहा जा रहा है कि इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है:

अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज हुई।

S&P 500 से कम समय में लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के नुकसान का दावा किया गया।

Strait of Hormuz में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई।

खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के बीमा खर्च में कई गुना वृद्धि होने का दावा किया जा रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है।

👥 मानव हानि

मिसाइल हमलों, सैन्य झड़पों, हेलीकॉप्टर और विमान दुर्घटनाओं के कारण दोनों पक्षों के सैकड़ों सैनिकों और कर्मियों के हताहत होने का अनुमान लगाया जा रहा है। साथ ही समुद्री तनाव के कारण आम जहाजरानी भी प्रभावित हो रही है।

अंत में यह लेख प्रश्न उठाता है कि क्या अमेरिका इस कथित दलदल से सुरक्षित बाहर निकल पाएगा, या यह संघर्ष अमेरिकी प्रभुत्व के पतन का कारण बनेगा?

Tuesday, June 2, 2026

इतना आसान नहीं है सावरकर हो जाना- कवि राजपाल सिंह

लखनऊ। स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर माय होम इंडिया द्वारा आयोजित "स्वातंत्र्यवीर सावरकर जयंती महोत्सव 2026" का भव्य आयोजन गोमती नगर स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज भागीदारी भवन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना के विविध आयामों पर चर्चा हुई।

इस अवसर पर प्रख्यात कवि एवं लेखक राजपाल सिंह की ओजस्वी काव्य प्रस्तुति रही। उन्होंने अपनी सशक्त रचनाओं के माध्यम से स्वातंत्र्यवीर सावरकर के त्याग, तपस्या और राष्ट्रसमर्पण को जीवंत कर दिया। उनकी पंक्तियां 

"तिल-तिलकर तपना और सोए राष्ट्र को जगाना,

इतना आसान नहीं है सावरकर हो जाना।"

ने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया।

अपने काव्य पाठ में उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा, सांस्कृतिक अस्मिता और समाज की चुनौतियों पर भी मुखर स्वर में विचार व्यक्त किए। उनकी पंक्तियां

"वक्त आ गया सुनो हिन्दुओ, जीना है तो लड़ना सीखो,

पर उपस्थित श्रोताओं ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन राष्ट्रभक्ति, साहस और आत्मबल का अनुपम उदाहरण है। विशिष्ट अतिथि एवं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री असीम अरुण ने युवाओं से सावरकर के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया। पूर्व बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. (डॉ.) सतीश द्विवेदी ने सावरकर को भारतीय राष्ट्रचेतना का प्रखर प्रवक्ता बताया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं माय होम इंडिया के संस्थापक श्री सुनील देवधर ने कहा कि सावरकर के विचार आज भी भारत की राष्ट्रीय अस्मिता को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। अध्यक्षता कर रहे महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री श्री कृपाशंकर सिंह ने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की प्रेरणा हमें सावरकर के जीवन से मिलती है।


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प्रख्यात समाजसेवी एवं चिकित्सक डॉ. साजिद हुसैन का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

  जरवल कस्बा, जनपद बहराइच के सुप्रसिद्ध चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. साजिद हुसैन का आज सुबह, 28 जुलाई 2026 को निधन हो गया। उनके निधन का समाचार ...