Wednesday, June 17, 2020

कोरोना वायरस खत्म करने में क्या ये तीन तरीके आएंगे काम, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?


कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण देश और दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। बढ़ते कोरोना संक्रमण को रोकना, जल्द से जल्द इसका तोड़ ढूंढना और जनमानस के लिए उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। कोरोना की वैक्सीन और दवा के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक शोधरत हैं। बहुत सारे शोध के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। जबतक वैक्सीन नहीं आ जाती, तबतक कोरोना के लक्षणों का इलाज किया जाना ही उपाय है। इसके अलावा कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क का प्रयोग जैसे तमाम एहतियात बरतने की जरूरत है। इस बीच मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की कोरोना से जुड़ी ताजा रिपोर्ट कोरोना के तोड़ के लिए तीन तरीकों को असरदार बता रही है। 


 


कोरोना वायरस से निजात के लिए जो सबसे कारगर तरीके अबतक सामने आए हैं, उनमें पहला तरीका है सख्त लॉकडाउन। इसके जरिए इस कोरोना का संक्रमण काफी हद तक रोका जा सकता है। भारत में चार चरणों में लॉकडाउन लगाया गया था। सख्त लॉकडाउन की बदौलत ही न्यूजीलैंड कोरोना मुक्त हो पाया। इसके साथ ही संक्रमण को रोकने के लिए अग्रेसिव टेस्टिंग भी अपनाना जरूरी बताया गया है। 


 


अब चूंकि यह वायरस पूरे विश्व में फैल चुका है, इसलिए केवल लॉकडाउन की रणनीति बहुत कारगर साबित नहीं हो पाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे केवल संक्रमण की दर को कम किया जा सकेगा, ताकि समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं तैयार की जा सके। संक्रमण रोकने के लिए अग्रेसिव टेस्टिंग भी एक तरीका है।


 


कोरोना से पूरी तरह निजात पाने के लिए वैक्सीन जरूरी है। इसके लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक लगे हैं, लेकिन इसे तैयार होने में अभी लंबा वक्त है। ऐसे में विशेषज्ञों के एक बड़ा वर्ग द्वारा पिछले दिनों हर्ड इम्यूनिटी अपनाने पर जोर दिया जा रहा था। हर्ड इम्यूनिटी यानी 60 से 70 फीसदी आबादी का या तो वैक्सीन से इम्यून कर दिया जाना या फिर उनके बीच संक्रमण फैलने देना। 


 


विशेषज्ञों का कहना था कि अगर वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता रहे और बड़ी आबादी इसकी चपेट में आए जाए तो बहुत सारे लोग अपनी इम्यूनिटी के दम पर कोरोना को मात दे देंगे। यह स्थिति संक्रमण के प्रति इम्यून होने की है। ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक हो जाए तो वायरस का संक्रमण नहीं फैल पाता। हालांकि सीएसआईआर यानी वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान परिषद ने इसे भारत के लिए उचित नहीं बताया है।  


 


एक अनुमान के मुताबिक, अगर कोरोना वायरस संक्रमण को रोका न जाए तो यह वायरस एक साल के अंदर दुनिया की 60 फीसदी आबादी को संक्रमित कर देगा। इस स्थिति में खुद-ब-खुद हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो जाएगी, इस संक्रमण को रोक देगी। लेकिन इस दौरान मानव जाति को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। बड़ी संख्या में लोगों की मौत होगी। इसलिए बिना वैक्सीन के हर्ड इम्यूनिटी का तरीका सुरक्षित नहीं माना जाता


 


पिछले दिनों आए शोध अध्ययन और विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय कोरोना वायरस का औसतन रिप्रोडक्शन नंबर(R0) 2 और 2.5 के बीच है। यानी कि एक संक्रमित व्यक्ति दो या दो से ज्यादा स्वस्थ लोगों को संक्रमित कर रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क का इस्तेमाल जैसी सावधानियों के जरिए इस रिप्रोडक्शन नंबर को दो से घटाकर एक किया जा सकता है। 


अभी कोरोना वायरस एक से दो, चार, आठ, 16 होते हुए बहुत सारे लोगों में फैल रहा है। एक बड़ी आबादी इम्यून हो जाए तो आरओ घटकर एक रह जाएगा। फिर तमाम एहतियातों के जरिए अगर यह आरओ एक से भी कम हो जाए तो कोरोना वायरस का आउटब्रेक खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा। दुनिया की 60 फीसदी आबादी के इम्यून होने की स्थिति में कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा।


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