Monday, March 9, 2026

अकीदत के साथ निकला गिलीम के ताबूत का जुलूस ,हैदर मौला-या अली मौला की गूंजीं सदाएं

लखनऊ / अमीर-उल-मोमेनीन हजरत अली (अ.स.) को जरबत (तलवार) मारे जाने की याद में सोमवार को तड़के बड़ी अकीदत के साथ गिलीम में ताबूत का जुलूस निकाला गया। जिसमें में हजारों पुरूषों के अलवा पर्दानशीन महिलाओं व बच्चों ने काले लिबास पहने शिरकत की। मस्जिदे कूफा काजमैन से निकाला गया यह ताबूत इमामबाड़ा हकीम सैयद मोहम्मद तकी ले जाया गया। जुलूस को निकलवाने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किया गये थे। जुलूस से पूर्व सुबह 5.07 बजे मस्जिद में कारी ताहिर जाफरी ने फज्र की अजान दी। अजान होते ही मस्जिद परिसर नमाजियों से खचा-खच भर गया। मौलाना जहीर अहमद ने नमाजे जमाअत पढ़ायी। इसके बाद मौलाना मुत्तकी जैदी ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने जब 19वीं रमजान को हजरत अली (अ.स.) पर सुबह की नमाज के दौरान अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम ने जहर से बुझी तलवार से वार करने का मंजर बयान किया तो अजादार रोने लगे। मजलिस के बाद जैसे ही कंबल में लिपटा ताबूत बाहर आया तो अजादार ताबूत का बोसा लेने लगे। अब यह ताबूत अपनी मंजिल के लिए बढ़ने लगा। जुलूस के आगे 'जुलूसे शबीह ताबूत" का काला बैनर चल रहा था और मर्सियाख्वानी हो रही थी। मर्सियाख्वानी और आंसुओं के साथ यह जुलूस मंसूर नगर, गिरधारी सिंह इंटर कालेज, संजीवनी अस्पताल बिल्लौचपुरा होते हुए नक्खास होते हुए पाटानाला के पास पहुंचा। जहां पुरुषों ने ताबूत महिलाओं को सौंप दिया जिसे वह इमामबाड़ा हकीम सैयद मोहम्मद तकी में ले गयी। जुलूस के साथ हजरत अब्बास (अ.स.) के अलम भी थे। रास्ते के दोनों ओर ताबूत की जियारत करने वालों का हुजूम था। ताबूत देख हर आंख से आंसू जारी हो जाते थे। इसके बाद अलविदायी मजलिस हुई। जिसे मौलाना मीसम जैदी ने खिताब किया। मजलिस खत्म होते ही सीनाजनी के साथ  हैदर मौला-या अली मौला की आवाजे गूंजने लगी।



इमामबाड़ा अबुतालिब में ताबूत की जियारत आज


इमामबाड़ा अख्तर हुसैन हसन पुरिया में मंगलवार को रात 9  बजे मजलिस होगी। मजलिस के बाद ताबूत की जियारत होगी। अंजुमन गुंचाए मजलूमियां की ओर से इस साल भी इमामबाड़ा अबुतालिब हसन पुरिया में मंगलवार मजलिस होगी। अंजमुन के सचिव इमरान अखतर ने बताया कि मजलिस को मौलाना अब्बास इरशाद रात 11 बजे खिताब करेंगे। मजलिस के बाद ताबूत की जियारत होगी व अंजुमन नौहाख्वानी करेंगी।


...आलमे शबे जरबत ऐ मोमिनों आयी है

-पुराने शहर में गूंजी हैदर मौला-या अली मौला की सदायें

-इमाम के गम में पहने काले लिबास


लखनऊ । हजरत इमाम अली (अ.स.) की शहादत के गम में शहर में 'हैदर मौला-या अली मौला की सदाएं गूंजती रहीं। इमाम का गम मनाने के लिए शियों ने काले लिबास पहन लिए। जगह-जगह मजलिसों व मातम का आयोजन करके उनकी शहादत का गम मनाया जा रहा है। जहां आज सुबह से ही पुरूषों व बच्चे ने विभिन्न कर्बलाओं व इमामबाड़ों में होने वाली मजलिसों में शिरकत की,वहीं महिलाओं ने घरों में नौहाख्वानी की। हर एक घर में यह नौहा पढ़ा गया। 'आलमे शबे जरबत ऐ मोमिनों आयी है, तारीक सी दुनिया पर हर सिम्त को छायी है,19वीं रमजान को शब भर मेरे मौला ने तकिये पर सर न रखा और नींद न आयी है। अजाखाने अख्तर हुसैन हसनपुरिया में महिलाओं की मजलिस को जाकिरा फिज्जा फातिमा ने खिताब किया। इसके बाद ताबूत की जियारत करायी गयी। ताबूत की आयोजक शीबा जैदी ने ताबूत में आयी सभी का शुक्रिया अदा किया। आज सुबह नजफ में हजरत अली (अ.स.) का ताबूत सजा दिया गया। जिसे हसन मिर्जा के ताबूत के नाम से जाना जाता है। आज यहां मौलाना अम्मार काजिम जरवली व मीसम जैदी ने मजलिस को खिताब किया। सुबह से देर रात तक पुरूषों ने ताबूत की जियारत की और अंजुमन गुंचाए मजलूमिया, काजमिया आबिदया, रौनके दीने इस्लाम और फिरदौसिया आदि ने नौहाख्वानी व मातम किया। इमामबाड़ा लाडो खानम नक्खास व काजमैन में मौलाना मीसम जैदी, हसन पुरिया स्थित अजाखाना जफर रजा और अजाखाना कमर हुसैन में मौलाना सैफ अब्बास ने मजलिस को खिताब करते हुए हजरत अली को नमाज़ पढ़ने के दौरान मारी गई तलवार का मंजर बयान किया तो अजादार रोने लगे। इमामबाड़ा नाजिम साहब में मौलाना यासूब अब्बास,कर्बला अजमतुतदौला और मस्जिदे कूफा काज़मैन में मौलाना अब्बास इरशाद नकवी ने मजलिस को खिताब किया। 


कल सुबह निकलेगा 21वीं रमजान का जुलूस  


लखनऊ। हजरत अली (अ.स.) की शहादत की याद में बुधवार को सुबह 3 बजे रौजाए शबीह नजफ़ रुस्तम नगर में 21वीं रमजान के जुलूस की अलविदायी मजलिस को मौलाना यासूब अब्बास खिताब करेंगे। मजलिस के बाद महिलाएं ताबूत को रौजे से उठाकर पुरूषों को सौंप देंगी। जुलूस यहां से निकल कर छोटे साहब आलम रोड, कर्बला दियानुतदौला, काजमैन, मंसूर नगर तिराहा, गिरधारी सिंह इंटर कालेज, संजीवनी अस्पताल से दाहिने मुड़कर हैदरगंज, बुलाकी अड्डा होते हुए कर्बला तालकटोरा पहुंचेगा जहां ताबूत को दफ्न किया जायेगा। अजादार दिन भर कर्बला पहुंच कर हजरत अली (अ.स.) की तुरबत पर फातेहा पढ़ेंगे।

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