गोण्डा : मशहूर देश भक्ति तराना सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा, हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसितां हमारा लिखने वाले शायर अल्लामा मोहम्मद इकबाल मंगलवार ऊर्दू दिवस के मौके पर याद किये गये। नौं नवम्बर अल्लामा इकबाल का जन्म दिन ऊर्दू दिवस के तौर पर मनाया जाता है। कुछ शिक्षण संस्थाओं में कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए ऊर्दू डे मनाया गया।
शहर के फैजाबाद रोड़ स्थिति जिगर मेमोरियल इण्टर कालेज में उर्दू प्रवक्ता बदीउद्दीन अहमद की अगुवाई में ऊर्दू डे मनाया गया। उन्होंने अल्लामा इकबाल के अदबी जिन्दगी पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि कि अल्लामा इकबाल दूसरे देश में पैदा जरुर हुए थे पर उनका दिन हिन्दुस्तान के लिए ही धढ़कता था। प्रधानाचार्य रफीउल्लाह ने "हजारों साल नर्गिस अपने बेनूरी पे रोती है। बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदवर पेदा।। शायर की लाइनें पढ़कर अल्लामा इकबाल को दुनिया का सबसे बेहतरीन ऊर्दू शायर बताया। उन्होंने कहा कि इकबाल की यह लाइन 'मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना' हमेशा लोगों को सामाजिक एकता, भाईचारा व सौहार्द की प्रेरणा देती रहेंगी। कालेज के छात्रों मोहम्मद अनस, सईदुल इस्लाम ने उनकी शायरी पढ़कर इकबाल को याद किया। नेअमत उल्लाह, सुभाष चन्द्र जयसवाल, मोहम्मद आमीन सिराजी, पिन्टू भाई, इसरार नजर, समसुज्जुहा रहे।
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