महात्मा शोभन सरकार हुए ब्रह्मलीन, जानिये 15 साल के सूर्यभान कैसे बने एक महात्मा
शिवली के महात्मा संत शोभन सरकार( Sant Shobhan Srkar ) का बुधवार की सुबह निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। भक्त अपने आराध्य का अंतिम दर्शन के लिए व्याकुल दिखे। आपको बताते चले कि ये वही महात्मा शोभन सरकार है जिन्होंने साल 2013 में उन्नाव के डोंडिया खेडा में एक हज़ार टन सोना होने का दावा किया था, जो महीनो देश विदेश की मीडिया में सुर्खिया बनी रही.
महात्मा शोभन सरकार हुए ब्रह्मलीन, जानिये 15 साल के सूर्यभान कैसे बने एक महात्मा 1
कानपुर देहात (Kanpur Dehat ) के शिवली रोड पर मौजूद संत शोभन सरकार के आश्रम से बुधवार की सुबह जो खबर निकल कर लोगों तक पहुंची, उसे सुनकर लोग एकबारगी भरोसा ही ना कर पाए, मगर धीरे – धीरे उनके निधन की खबर जंगल में लगे आग की तरह फ़ैल गयी. यहाँ खबर उनके प्रति श्रधा रखने, उनको अपना आराध्य मानने वाले और उन्हें भगवान् का दर्जा देने वाले श्रधालुओं के लिए बेहद पीडादायक रही. देखते ही देखते श्रधालुओं का हुजूम ब्रह्मलीन हुए शोभन सरकार के आश्रम पर इकठ्ठा होने लगा. हर कोई उनके अंतिम दर्शन के लिए व्याकुल दिखे.
जानिये कौन है शोभन सरकार
महात्मा शोभन सरकार हुए ब्रह्मलीन, जानिये 15 साल के सूर्यभान कैसे बने एक महात्मा 2
संत शोभन सरकार का असली नाम श्री श्री 1008 स्वामी सतसंगा नन्द जी महाराज है। कहते है शोभन सरकार बाल योगी के रूप में 15 साल की उम्र में बक्सर के आश्रम में अपने गुरु जी की शरण में चले गए थे। यहाँ संत शोभन सरकार ने अपने आप को सिद्ध करने के लिए करीब 8 साल तक कठोर तप किया था. जिससे प्रसन्न होकर उनके गुरु ने उनको कानपुर के शिवली में बने शोभन मंदिर के आश्रम का भार सौप दिया था। 23 साल की उम्र में श्री श्री 1008 स्वामी सतसंगा नन्द जी महाराज का नाम सन शोभन सरकार पड़ा था।
15 साल की उम्र में घर त्याग बन गए थे वैरागी –
महात्मा शोभन सरकार हुए ब्रह्मलीन, जानिये 15 साल के सूर्यभान कैसे बने एक महात्मा 3
कानपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर शिवली थाना अंतर्गत आने वाला गाँव शुक्लनपुरवा। करीब तीन सौ आबादी वाले इसी गाँव में संतशोभन सरकार का जन्म हुआ था। संत शोभन सरकार बचपन से ही भगवान् के भक्ति में लीन रहते थे। 12 वीं तक की शिक्षा लेने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। संत शोभन सरकार की माँ ने उनका नाम सूर्यभान रखा था, मगर जब उन्होंने बक्सर में दीक्षा ली उसके बाद उनके गुरु जी ने उनका नया नाम दिया था उदयभान। मगर शोभन मंदिर में आने के बाद उनके भक्तो ने उन्हें नया नाम संत शोभन सरकार रख दिया था. संत की उपाधि मिलाने के बाद संत शोभन से उनकी माँ और भाई उनसे मिलने दो तीन बार शोभन आश्रम में गए थे। मगर संत शोभन ने अपनी माँ और दोनों भाइयो से मिलने से मना कर दिया था। हांलाकि संत शोभन सरकार को उनके गांववाले भी भगवान् मानने लगे थे. मगर उनके गांव का कोई भी शख्स मिलने उनके आश्रम नहीं जाता था. दरअसल संत शोभन ने अपने आश्रम के कार्यकर्ताओं को सख्त आदेश दिया है कि कोई भी उनके गांव का व्यक्ति आश्रम में प्रवेश नहीं करना चाहिए. हांलाकि इसके पीछे की वजह क्या थी ये आज भी रहस्य बना हुआ है.
इन कामों की वजह से श्रद्धालु मानते हैं इन्हें भगवान् –
महात्मा शोभन सरकार हुए ब्रह्मलीन, जानिये 15 साल के सूर्यभान कैसे बने एक महात्मा 4
नंबर एक – शोभन आश्रम जो लोगो के लिए दर्शनीय स्थल बन चूका है।
नंबर दो – इस परिसर में बनी झील जिसके पानी से एक दर्जन से ज्यादा गांवो को फ्री में पानी दिया जा रहा है।
नंबर तीन – यहाँ चलने वाला अनवरत भंडारा जहां दिनभर में एक हज़ार से ज्यादा लोग खाना खाते है।
नंबर चार – आसपास के कई गांवो में शोभन सरकार के सहयोग से चलने वाले स्कूल जहा बच्चे निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करते है।
नंबर पांच – शोभन सरकार बारहों महीने जमीन पर एक चादर बिछाकर सोते है।
नंबर छेह – सरकार जो बोलते है वो होकर रहता है। पांडू नदी पर बने पांच पुल एसे है जो लाख कोसिसो के बाद भी नहीं बन रहे थे तब शोभन सरकार ने ही वहा खड़े होकर पुल बनवाया था जिसे बाद में राज्य सरकार को सौप दिया गया।
(रिपोर्टर - प्रभात नागेन्द्र त्रिवेदी)
No comments:
Post a Comment