Wednesday, May 13, 2020

जिसनें अपनें क़ातिल के सामनें भी इंसाफ़ से मुंह नहीं मोङा, ऐसा हाकिम #


#अय्यामें ग़म
#आह 19वी रमज़ान और #मस्जिदे कूफ़ा 
#सलाम# हो हमारा क़ुर्बान जाऊँ मैं और मेरे #मांबाप# उस #अज़ीम करीम व #मेहरबान इमाम  #हज़रतअली इब्ने अबीतालिब अस# #अमीरूल #मोमिनीन पर कि जिनकी शहादत😭 के #1400सौ# साल  हो गए , #उसकी# शहादत जिसके वजूद नें यतीमों को एहसासे यतीमी न होने दिया, बे सहारों का सहारा, किसी की आस, किसी की उम्मीद , जिन्हें अपने बच्चों का भूखा रहना तो गवारा था, मगर #यतीम(अनाथ)बच्चों की भूख बर्दाश्त न थी, जो कहेते थे #यतीम सरमाया# हैं,जो #इन्सानियत का इमाम था,जिनकी #हुकूमत में कभी कोई भूखा न सोया, जो मजलूमों को देखता तो तङप उठता,  जिसनें कमज़ोरों को अपने #अद्लो इंसाफ़ का हिसार अता किया,जो #मज़लूमों की देफ़ा के लिए एक आहनी दीवार बना,वह जो इंसाफ़ का अलमबरदार, जिसनें अपनें क़ातिल के सामनें भी #इंसाफ़ से मुंह नहीं मोङा , ऐसा #हाकिम की उसके #अद्लो इंसाफ़ की शिद्दत ही उसके शहादत का सबब बनी😭   
                       #उसकी# शहादत, जिनकी #पुश्त पर उभरे निशान  #रज़्ज़ाक़ियते परवरदिगार का मज़हरऔर जलवागाह रहे ,किसी यतीम को #रोता देखते, तो जब तक उसके चेहरे पर मुस्कराहट ना ला देते चैन ना मिलता, जिसने ज़ालिम का मुकाबला भी उसकी #हिदायत के लिए किया, वह बे लौस मोअल्लिम ,जो #उम्मत को जिहालत से निकालने के लिए सलूनी- सलूनी की सदा देता रहा ,वह अज़ीम #मुहाफ़िज़े इन्सानियत जिसने हर साहिबे हक़ तक उसका हक़ पहुंचाया, ऐसा शफ़ीक़ करीम #मेहरबान बाप कहां मिलेगा, जो #यतीमों के बीच बैठ कर उनका रंजो ग़म दूर करे ,ऐसा #आक़ा कहां से लाएं जो समाज में ज़ुल्मों ना इन्साफ़ी को बर्दाश्त ना कर सके,ऐसा हाकिम कहां से लाएं, जिसकी हुकूमत में मुसलमान और ग़ैर मुसलमान बराबर का हक़ रखता हो,जो किसी ग़ैर मज़हब ख़ातून की बे हुरमती भी बर्दाश्त ना कर सके,वह #मौला जो सबका है ,सबके लिए है,जिसका करम  आम है, जिसकी शफ़क़त वसीअ है, जिसका दामन कमज़ोरो का सहारा और पनाहगाह है,जिसकी शहादत किसी एक की शहादत नहीं, यतीम बच्चों के एक मेहरबान बाप की शहादत है,बे सहारो के सहारे की शहादत है, महेरूमों की उम्मीद,मज़लूमों की आस,बे आसरों की पनाह गाह,कमज़ोरों के हामी की शहादत है जब वक़ते आख़िर उम्मत का हर तबक़ा गिरिया कुनां दरे अली पर जमा हुआ,जब लोग अपने #सरपरस्त की एक झलक पाने को बेताब थे,जिसकी शहादत के वक्त यतीम बच्चों को अपने करीम इमाम और मेहरबान बाप लिए  #दूध का प्याला लिए #बैतुश्शरफ़ (अली अस के घर )का तवाफ़ करने लगे ,तो हर दिल ने तस्लीम किया,#अली# अस #सबके है और #सबके लिए हैं ।😭
             ऐ #अमीर आप पर हमारा सलाम 😭😭😭😭😭😭
                                           


 ज़ीशान अली आज़मी लखनऊ


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