Sunday, December 1, 2019

Hyderabad rape case - पीड़िता का नाम लिखने पर हो सकती है जेल  

पीड़िता का नाम लिखने पर हो सकती है जेल   
भारतीय दंड संहिता की धारा 228 के तहत यह कानून है कि यौन उत्पीड़न या दुष्कर्म से पीड़ित किसी भी व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की जा सकती। पीड़ित का नाम मुद्रित या प्रकाशित करने वाले व्यक्ति या संस्था को ऐसा करने पर दो साल की जेल और जुर्माना हो सकता है। 



पहचान उजागर होने से बढ़ जाता है संघर्ष 
- पीड़ित व्यक्ति की निजता के अधिकार का होता है उल्लंघन
- पीड़िता को मानसिक और सामाजिक चुनौतियां झेलनी पड़ती हैं 
- अज्ञात बलात्कारी पीड़िता की पहचान का लाभ उठा सकता है 
- पूर्वाग्रह से ग्रस्त पुलिस, मेडिकल अफसर और वकील दुर्भव्यहार करते हैं 
( ह्यूमन राइट वॉच की 'एंवरीवन ब्लेम मी ; बैरियर टू जस्टिस एंड सपोर्ट सर्विस फॉर सेक्सुअल असॉल्ट सरवाइवर इन इंडिया' रिपोर्ट के मुख्य बिंदु ) 


विडंबना : 93 फीसदी दुष्कर्मी करीबी 
पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना जितना जरूरी है, उतना ही मुश्किल होता जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की हाल में जारी रिपोर्ट बताती है कि 2017 में भारत में कुल 32,559 बलात्कार हुए, जिसमें 93.1% आरोपी करीबी थे।  


गोपनीयता का सबसे बड़ा उदाहरण निर्भया कांड  
2012 में 16 दिसंबर को हुए गैंग रेप ने पूरे देश को झकझोरकर रख दिया था। भारत में सोशल मीडिया के दौर का यह पहला मामला था जिसने जनचेतना मुखर कर दी। इस स्थिति में पीड़िता की निजता बनाए रखने के लिए उच्चतम न्यायालय ने विशेष निर्देश जारी किए थे। यह ऐसे समय हुआ जब निर्भया मामले में पीड़िता के अभिभावक चाहते थे कि उनकी बेटी का नाम सार्वजनिक हो।  


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