Wednesday, February 18, 2026

जश्न-ए-इस्तक़बाल-ए-ज़ायरीन-ए-अतबात-ए-आलिया

लखनऊ बमक़ाम असगर विला, कश्मीरी मोहल्ला में ज़ायरीन-ए-अतबात-ए-आलिया के सम्मान में एक गरिमामय और रूहानी जश्न-ए-इस्तक़बाल का आयोजन किया गया। इस मुबारक महफ़िल का आयोजन अत्यंत अकीदत और एहतराम के साथ किया गया, जिसमें मोहल्ले के लोगों और शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की।

कार्यक्रम का संचालन प्रो०डॉ०अब्बास रज़ा नैय्यर जलालपुरी ने अत्यंत सुंदर ढंग से किया। कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-क़ुरआन-ए-पाक से हुई, जिसके बाद नात व मनक़बत पेश की गई।

इस अवसर पर मौलाना अब्बास इरशाद नक़वी और मौलाना यअसूब अब्बास ने “फ़ज़ाइल व अहमियत-ए-ज़ियारत-ए-कर्बला” विषय पर प्रभावशाली और ईमान-अफ़रोज़ ख़िताब किया। वक्ताओं ने ज़ियारत-ए-इमाम हुसैन (अ.) की रूहानी बरकतों और उसकी मानवीय व नैतिक अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज़ियारत-ए-कर्बला इंसान के ईमान को ताज़गी देती है और उसे सब्र, इस्तिक़ामत तथा राह-ए-हक़ पर क़ायम रहने का सबक़ सिखाती है।

इसके बाद ज़ायरीन की गुलपोशी की गई और उन्हें मुबारकबाद पेश की गई। ज़ायरीन ने अपने सफ़र के रूहानी तास्सुरात भी बयान किए, जिससे महफ़िल का माहौल और भी नूरानी व असरदार हो गया।

कार्यक्रम का समापन हुज्जतुल इस्लाम मौलाना रज़ा हुसैन साहब के दुआइया कलिमात पर हुआ। इस मौके पर अबूज़र कंतूरी, ज़रग़ाम हैदर, समर रज़वी, बहजत साहब और मौलाना निहाल हैदर भी बराबर मौजूद रहे।

यह रूहानी और ईमान-अफ़रोज़ कार्यक्रम देर रात तक जारी रहा और उपस्थित लोगों ने इसे एक यादगार और मुबारक महफ़िल क़रार दिया।


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