लखनऊ 17 जनवरी 2020 ! केन्द्र सरकार द्वारा पाकिस्तान अफगानिस्तान और बंगलादेश के अल्पसख्को को नागरिक्ता दिए जाने के लिए बनाए गए नागरिक्ता संशोधन कानून , प्रस्तावित एनआसी और एनपीआर के खिलाफ लखनऊ मे एक बार फिर विरोध की आवाज़े उठने लगी है ।
इस बार शान्तीपूर्ण आन्दोलन की कमान महिलाओ ने सम्भाली है। शुक्रवार की दोपहर हुसैनाबाद स्थित ऐतिहासिक घंटा घर के पास सैकड़ो महिलाओ द्वारा पहुॅच कर एनआरसी सीएए और एनपीआर के खिलाफ शान्तीपूर्ण धरना शुरू किया गया तो पुलिस के हाथ पाॅव फूल गए।
लखनऊ मे सरकार द्वारा लागू की गई कमिश्नर प्रणाली केे बाद एनआरसी सीएए और एनपीआर के खिलाफ ये पहला प्रदर्शन है। घंटा घर के मैदान मे एकत्र हुई महिलाए नारे लिखी हुई तखतियां हाथ मे लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ नारे लगा रहीं थी।
दोपहर से शुरू हुए महिलाओ के घरने को समाप्त कराने के लिए पुलिस के आला अधिकारियो ने लाख कोशिशे की लेकिन महिलाएं धरना समाप्त करने के लिए किसी भी दशा मे राज़ी नही हुई। धीरे धीरे रात का अन्धेरा बढ़ता गया और पूरा घंटा घर कोहरे की आगोश मे समा गया जीरो वीज़िबिलिटी के बीच घंटा घर के खुले मैदान मे महिलाए अपने मासूम बच्चो के साथ डटी रही।
रात करीब 10 बजे घंटा घर के आसपास लगी लाईटे भी बुझने लगी लेकिन भारतीय संविधान की सुरक्षा की की कसम लेने वाली महिलाओ के पक्के इरादे को न तो रात का घुप अन्धेरा ही तोड़ सका और न कड़ाके की ठन्ड न कोहरा । रात गहरी होती गई और सीएए एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ धरना दे रही महिलाओ की सख्ंया मे लगातार इज़ाफा होता रहा। धरने पर डटी महिलाओ मे सभी धर्मो की महिलाए एक स्वर मे सरकार से मांग कर रही थी कि उन्हे किसी भी दशा में ये जन विरोधी कानून मान्य नही है। महिलाओ के धरने मे मौजूद मासूम बच्चो का जोश देख कर बच्चो की माओं का जोश भी बढ़ता गया। रात के अन्धेरे मे धरना दे रही सैकड़ो महिलाओ ने मोम बत्तिया जला कर प्रर्दशन किया। केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए नागरिक्ता कानून को धरने मे शामिल महिलाए पक्षपात पूर्ण और हिन्दू मुस्लिम एकता को तोड़ने वाला एंव संविधान विरोध कानून बता कर सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग कर रही थी। कड़ाके की ठंन्ड रात के अन्धेरे मे खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक की चटाईयो पर बैठ कर बैठ कर धरना दे रही महिलाओ का कहना था कि उनका ये धरना अनिश्चित काल के लिए है जब तक सरकार इस कानून को वापस लेने के घोषण नही करती है तब तक उनका धरना शान्तीपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।
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