गोण्डा, 7 मई। लाकडाउन के चलते एक परिवार ने घर पर ही दैहिक दूरी का पालन करते हुए बैसाख की पूणिमा पर गौतमबुद्ध को याद किया। शिक्षक घनश्याम मौर्या ने गौतमबुद्ध के चित्र पर माल्यार्पण किया ।अपने परिवार वालों को बुद्ध जी के जीवन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।बैसाख की पूर्णिमा को गौतमबुद्ध लुम्बनी में पैदा हुए थे। उन्होंने बताया कि एक राजकुमार होते हुए सिद्धार्थ ने लोगों के जीवन से दुख तकलीफ को दूर करने के लिए राजसत्ता छोड़ दी। लोगों को कल्याण के मार्ग पर लेजाने के लिए जीवन की सारी खुशी को छोड़ कर सन्यासी हो गमे।उन्होंने बताया कि गौतम बुद्ध दूसरों के तकलीफ को देखकर परेशान होजाते थे। बुद्ध ने शताब्दियों पहले कहा था संसार दुख का महासागर है।उन्होंने कहा था कि लोगों के जीवन से दुख - दर्द को खत्म करके जरुरत है। राधेश्याम मौर्या, माया देवी, शिवश्याम मौर्या, मन्जू देवी, उषा मौर्या, आशुतोष, गुडिया रहीं।
Thursday, May 7, 2020
पूर्णिमा पर याद किये गये गौतमबुद्ध
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