नई दिल्लीः पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में की गई रिकॉर्ड बढ़ोतरी से चालू वित्त वर्ष में सरकार को 1.6 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो सकती है। उत्पाद शुल्क और दिल्ली में राज्य सरकार के वैट बढ़ोत्तरी के बाद पेट्रोल-डीजल पर कुल कर उनकी कीमत का 70 प्रतिशत हो गया। इससे सरकारों को कोरोना वायरस संकट के चलते लॉकडाउन (बंद) से हो रहे राजस्व नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मंगलवार देर रात सरकार ने पेट्रोल पर प्रति लीटर उत्पाद शुल्क 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये बढ़ा दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें दो दशक के निचले स्तर पर चली गयी हैं। इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए सरकार ने यह निर्णय किया है। सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने इस शुल्क बढ़ोत्तरी को अपने सर पर रही रखने का निर्णय किया। इसमें उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल कीमतों में आयी कमी से हो रहे लाभ से मदद मिलेगी।
उत्पाद शुल्क और दिल्ली सरकार के वैट में बढ़ोत्तरी के बाद राजधानी में पेट्रोल और डीजल पर कुल कर इनकीकी कीमत का 70 प्रतिशत हो गया है। दिल्ली में पेट्रोल की लागत 18.28 रुपये प्रति लीटर बैठती है. लेकिन इस पर 32.98 रुपये का उत्पाद शुल्क, 3.56 रुपये का डीलर कमीशन और 16.44 रुपये का वैट है. इस प्रकार यह कीमत 71.26 रुपये प्रति लीटर हो जाती है।
इसी तरह राजधानी में डीजल की लागत 18.78 रुपये प्रति लीटर है. इस पर 31.83 रुपये का उत्पाद शुल्क, 2.52 रुपये का डीलर कमीशन और 16.26 रुपये का वैट है. इससे यह कीमत 69.39 रुपये प्रति लीटर होती है।
औद्योगिक सूत्रों के मुताबिक दो महीने से कम की अवधि में यह दूसरी बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया है। वित्त वर्ष 2019-20 के बराबर उपभोग होने पर इससे सरकार को 1.7 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है।
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