Wednesday, May 6, 2020

एक प्राइवेट डॉक्टर की कलम से।


सरकारी आदेश, सिद्धांत और ज़िमेदारी से बंधे हुए डॉ मित्र, क्लिनिक/अस्पताल बंद नहीं कर सकते। स्टाफ निकाल नहीं सकते।
मरीज़ आते नहीं, क्योंकि सड़क पर परिवहन बिल्कुल बन्द है। मरीज़ आये तो PPE, सैनिटाइजर इत्यादि का इस्तेमाल पर आने वाले खर्च उनसे ले नहीं सकते क्योंकि वो बेचारा पहले से ही बेरोज़गार या कम से कम लाचार ज़रूर हो चुका है। कितना बोझ डालियेगा?
आमदनी बन्द, खर्चा चालू, सरकारी डंडा तेज़, 
जांच की व्यवस्ता है नहीं।
इलाज़ केलिए दवाई मिल नहीं रही है।
सामान्य दवाई, मास्क, सैनीटाइजर इत्यादि की काला बाज़ारी हो रही है। 
चीनी वायरस से टकरा गए तो आपको सील किया जाएगा। मीडिया आपको ऐसे पेश करेगी जैसे आपका क्लिनिक क्लिनिक नहीं मरकज़ हो गया हो..
इन सब के बाद भी हिम्मत कर के काम पर डटे रहिये तो भी समाज की निगाह में...
..लोभी डॉक्टर ..अभी भी पैसा का मोह नहीं जा रहा है....
सरकारी अस्पतालों में कोरोना के अलावा अन्य मरीज़ों को कोई सुविधा नही।
अब प्राइवेट डॉक्टर काम करे तो आफ़त ना करे तो आफ़त , प्रशासन की भयंकर उपेक्षा .अन्य मरीज़ फिर कहाँ जाएँ , प्राइवेट डॉक्टर स्वयं जौखिम में काम कर रहा है , मौत का डर सबको लगता है , किंतु कर्तव्य आड़े आ जाता है।


No comments:

Post a Comment

अकबरपुर में 2 मुहर्रम का कदीमी जुलूस अकीदत और शानो-शौकत के साथ सम्पन्न

  गाँव अकबरपुर, पोस्ट ऑफिस खोरहँसा, जनपद गोंडा, देवी पटन मण्डल में 2 मुहर्रम का कदीमी जुलूस गुरुवार को बड़े अदब, एहतराम और धार्मिक श्रद्धा क...