'साहब! पुलिस दिन में खाना देती है, रात को लाठी मारती है'

कानपुर -  पुलिस दिन में खाना देती है और रात में लाठी मारकर भगाती है। घर जा नहीं सकता हूं। पास में एक भी पैसा नहीं है। यह दर्द कानपुर के मूलगंज चौराहा के पास इकट्ठा हुए मजदूरों ने बयां किया। यहां कई मजदूर रोजी की तलाश में निकल आए।



कानपुर के मूलगंज चौराहा पर आम दिनों में रोज सुबह दिहाड़ी मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में इकट्ठा होते हैं। सुबह 8 बजे चौराहा के चारों ओर पांच या छह मजदूर अलग-अलग काम की चाहत में खड़े मिले। रायबरेली के लालगंज निवासी पुन्नू ने बताया कि 200 रुपए दिन भर की मजदूरी में काम करने को तैयार हूं। कोई सफाई का काम तक नहीं करा रहा है। खाने की कमी नहीं है। यहां लोग खाना बांटने आते हैं। पुलिस भी खाना बांटती है। पैसा न होने से बुरी हालत है।


असोम के प्रफुल्ल ने बताया कि यहां रोज मजदूर चौराहा का आसपास की सड़क किनारे फुटपाथ पर सोते हैं। दो दिन से पुलिस ने मेन सड़क से खदेड़ना शुरू कर दिया है। कई मजदूरों को लाठी से पीटकर खदेड़ा गया। गलियों में लेट कर किसी तरह रात काट रहे हैं। गलियों में भी लोग टोकते हैं। कई बार लोग दूसरी जगह लेटने को कहकर भगा देते हैं।



सिधौली के संपत का कहना है कि शनिवार को बांस मंडी के पास एक घर में बाहर रखी ईंट छत तक चढ़ाने का काम मिला। शाम 6 बजे तक काम करने पर 250 रुपए मिले। लौटते समय पुलिस ने आने नहीं दिया। डिप्टी पड़ाव के पास एक लकड़ी के दुकान के बाहर लेटकर रात काटी। बड़ी मुश्किल से दिन रात कट रहे हैं।


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