पंडित नेहरू के किस सपने को पूरा करना चाहते हैं PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा कि अब वक्त आ गया है कि अधिकार के बजाय अब कर्तव्य निभाने पर जोर दिया जाए. पीएम ने कहा कि अब देश को कर्तव्य की राह पर ले जाने की जरूरत है. पीएम मोदी ने इसके लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू के 67 साल पुराने बयान को सदन में पेश किया और कहा कि दुनिया को भारत की सबसे बड़ी सीख है ये कि सबसे पहले कर्तव्य आते हैं इन्हीं कर्तव्यों से अधिकार निकलते हैं. उन्होंने कहा कि पंडित जी के सपने को पूरा करने का वक्त आ गया है !



लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ये एक ऐसा मौका है जब हम देश को अधिकार की ओर से कर्तव्यों की ओर ले चलें. नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे देश में किसी न किसी कारण से अधिकार पर ज्यादा चर्चा होती रही है. पीएम ने बापू के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि हर अधिकार के साथ एक कर्तव्य जुड़ा रहता है.


इसके बाद पीएम मोदी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के एक कथन को सदन में पढ़ा, "दुनिया को भारत की एक सबसे बड़ी सीख ये है कि यहां सबसे पहले कर्तव्य आते हैं, और इन्हीं कर्तव्यों से अधिकार निकलते हैं, आज के आधुनिक भौतिकवादी विश्व में जहां हर तरफ टकराव दिखाई पड़ते हैं वहां हर कोई अपने अधिकारों और सुविधा की बात करता है. शायद ही कोई कर्तव्यों की बात करता है. यही टकरावों की वजह हैं...ये वास्तविकता है कि अधिकारों और सुविधाओं के लिए ही हम लड़ाई लड़ते हैं, लेकिन ऐसा करने में अगर हम कर्तव्यों को भूल जाएं तो ये अधिकार और सुविधाएं भी हमारे पास नहीं रह पाएगी"


PM ने कहा कि जिस महापुरुष ने ये बात कही है उन्हें भुला दिया गया है. पीएम मोदी ने कहा कि क्या हम उनकी इस बात को आगे ले जा सकते हैं? पीएम मोदी ने कहा कि ये बयान पंडित नेहरू ने पहले चुनाव के वक्त कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी होने से पहले 14 जुलाई 1951 को दिया था.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो सपना नेहरू ने 1951 में देखा था उसे आज हम पूरा कर सकते हैं. देश को कर्तव्य की राह पर ले जाने के लिए सबको साथ लेकर चल सकते है. नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश का अनुभव ऐसा है जब जब हमारे महापुरुषों ने देश से आह्वान किया लोगों ने स्वीकार किया. इसका मतलब है कि देश तैयार है. हमें 130 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए.


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